दाल-बाटी, दाल-पानिया, गक्कड़-भर्ता, और लिट्टी-चोखा में अंतर

जानिए कैसे अलग है एक दूसरे से दाल-बाटी, दाल-पानिया, गक्कड़-भर्ता, और लिट्टी-चोखा

एक से दिखने वाले दाल-बाटी, दाल-पानिया, गक्कड़-भर्ता, और लिट्टी-चोखा में अक्सर अलग-अलग राज्य के लोग उतनी सहजता से अंतर नहीं कर पाते जितनी सहजता से आज मैं आपको बताने जा रही हूँ।

दरअसल इन चारों व्यंजनों में जो मुख्य है, यानि की बाटी, पानिया, गक्कड़और लिट्टी; ये एक सा दिखता है। जबकि इन चारों को बनाने की विधि और सामग्री अलग है। उसी तरह दाल तो दाल ही रहती है चाहे बाटी के साथ खाये या पानिया के साथ पर छौकने का तरीका बदल जाता है। और ऐसे ही गक्कड़-भर्ता और लिट्टी-चोखा में जो भर्ता और लिट्टी है वह एक ही है परन्तु बनाने की विधि और सामग्री अलग है।तो चलिए शुरू करते है इन सभी का विस्तृत परिचय:

दाल-बाटी 

मुख्यतः राजस्थान से आने वाली दाल बाटी मध्य प्रदेश के निमाड़ और मालवा क्षेत्र में भी काफी लोकप्रिय है। राजस्थान से जुडी एक लोक कहावत के अनुसार “दाल-बाटी, चूरमा खाये राजस्थान का सुरमा”😎💪

दाल-

बाटी में बनायीं जाने वाली दाल अमूमन तुवर दाल और चना दाल को मिला कर बनायीं जाती है। ये दाल थोड़ी तीखी होती है क्युकी इसमें मिला के खाई जाने वाली बाटी फीकी ही होती है। दाल को आप प्याज-लहसुन से भी छौंक सकते है और अगर आप किसी कारणवश प्याज-लहसुन नहीं कहते है तो दाल को खट्टी मीठी भी बना सकते है अमचूर और भुनी हुई मूंगफली के दाने डालकर। विस्तृत विधि किसी और ब्लॉग में बताउंगी।

बाटी –

बाटी बनाई जाती है गेंहू के मोटे आटे से।गेंहू के मोटे आटे में आप चाहे तो सिर्फ नमक, अजवाइन और मोयन डाल कर पानी से गूँथ सकते हैं या फिर उसमें थोड़ा सा बेसन और दही मिला के भी गूँथ सकते है। पसंद आपकी।

वैसे तो पारम्परिक तौर पर बाटी को गोबर के कंडो में सेंका जाता है, पर शहरीकरण के चलते बाटी ओवन में बनाया जाने लगा है।
इसके साथ बेसन गट्टे, तली हुई हरी मिर्च, हरी धनिया की चटनी और चूरमे का लड्डू परोसा जाता है। और हाँ, दाल-बाटी खाते समय घी का हिसाब नहीं रखा जाता। बाटी जितनी घी में डूबी होगी उतना अधिक स्वाद देगी।

दाल-बाटी 
दाल-बाटी 

दाल-पानिया

मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र से आता है दाल-पानिया। इस में तुवर दाल, चना दाल, उड़द दाल और मूंग दाल को मिला कर दाल बनाई जाती है।  ध्यान देने योग्य यह है की पानिया बनाने की सामग्री और विधि बाटी से अलग है। पानिया बनता है मक्के के आटे में चुटकीभर नमक और शक्कर मिलाकर दूध और पानी से गूँथने पर। इसे सेंका जाता है बड़, अकाव या खाकरी के हरे पत्तों के बीच रख कर कंडो में। दो पत्तों के बीच एक पानिया। पानिये की सिकाई दोनों पत्तों के भीतर ही होती है। दोनों पत्तों के जलने तक पानिया सिक कर तैयार हो जाता हैं। शहरीकरण के चलते पानिये ओवन में भी सेंके जा सकते हैं। पुरे सींक जाने के बाद पानियो को घी में लोटपोट किया जाता जिससे की घी उनके अंदर तक समां जाये फिर इन्हे खाया जाता है दाल, लहसुन की चटनी, केरी की चटनी, पुदीना की चटनी, कच्चे प्याज और तली हुई हरी मिर्च के साथ। मीठे में रवा के लड्डू परोसे जाते हैं। मध्य प्रदेश में आप दाल-पानिया का लुफ्त महेश्वर, अलीराजपुर और बड़वानी में उठा सकते है

दाल-पानिया , Daal Paniya
दाल-पानिया

गक्कड़-भर्ता

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से आता है गक्कड़-भर्ता, जो की प्रदेश के पुरे महाकौशल क्षेत्र में पसंद किया जाता है। गेंहू के मोटे आटे से बनने वाली गक्कड़ का रूप बाटी से काफी मिलता-जुलता होता है। इन्हे कंडे की गर्म राख में रखा जाता है और शेष बचे कंडे की राख़ से ढक दिया जाता है। यह गक्कड़ को धुएँ और मिट्टी का स्वाद देता है। जिसे फाइव स्टार के शेफ स्मोकी फ्लेवर कहते है। इसके साथ में खाया जाने वाला भर्ता इसे दाल-बाटी से अलग बनाता है। भर्ता बनाने के लिए बैंगन, प्याज, टमाटर, अदरक, लहसुन और हरी मिर्च को तेज आग में भुना जाता है। फिर उन्हें कच्चे सरसों के तेल के साथ मिलाया जाता है। गौरतलब है की घी की कमी तो यहाँ भी नहीं करी जाती। गक्कड़-भर्ता के साथ हरी चटनी परोसी जाती हैं।  

गक्कड़-भर्ता
गक्कड़-भर्ता

और अंत में आते है लिट्टी-चोखा पर..

लिट्टी-चोखा

बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखण्ड का पारम्परिक और प्रसिद्द व्यंजन लिट्टी-चोखा भी आपको घी से दूर नहीं रखेगा। लिट्टी को बनाने के लिए पहले गेंहू के आटे में चुटकीभर नमक डाल कर पानी से गूँथ लिया जाता है और अलग ढँक कर रख दिया जाता है। फिर सत्तू में निम्बू का रस, सरसों का तेल, अचार का मसाला और कच्चा प्याज मिला कर थोड़ा सूखा-सा गुंथा जाता है और गेंहू के आटे की बड़ी लोई बना कर उसमें भरा जाता है। इसके बाद इसे भी कंडो में या चूल्हे में सेंका जाता है। हालाँकि शहरीकरण के चलते अब ये भी माइक्रोवेव ओवन या तंदूर में सेंके जाने लगे है। चोखा होता है भर्ता। चोखा आप बेंगन, आलू, टमाटर को आग में भून के बना सकते है। अधिक मात्रा में अदरक और लहसुन का उपयोग होने के कारण लिट्टी-चोखा को सर्दियों में विशेष रूप से बनाया जाता है।

लिट्टी-चोखा
लिट्टी-चोखा

बाफला

कई जगहों पर दाल-बाफला भी बनाया और परोसा जाता है। बाफला और बाटी में इतना सा अंतर होता है की बाटी को सीधे ही कंडो में या ओवन में सेंक लिया जाता है जबकि बाफला को पहले पानी में उबाला जाता है फिर कपडे पर रख कर पानी सोखा जाता है और इसके बाद कंडो में या ओवन में सेंक लिया जाता है। बाटी की तुलना में बाफला अधिक नरम और पचने में आसान होता है।

अंत में

ये था मेरा प्रयास इन चार एक जैसे दिखने वाले मगर अलग-अलग व्यंजनों के बारे में आपको जानकारी देने का। ब्लॉग कैसा लगा कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताये। साथ ही ये भी बताये की आने वाले ब्लोग्स में आप किन व्यंजनों के बारे में जानना चाहते है।


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