रसगुल्ला बनिए; दूध बने रहने में क्या रखा है


नमस्कार पाठकों 

विषय पढ़ कर आप सोच रहे होंगे कि रसगुल्ला तो बनाते है पर उसमें उस के समान बनने जैसा क्या है? 

तो इस ब्लॉग में आप आपसे साँझा करने जा रही हुँ जीवन जीने की कला जो मैंने रसगुल्ले से सीखी है या यूँ समझ लीजिए कि रसगुल्ले बनाते समय मुझे जीवन के ज्ञान की प्राप्ति हो गयी।

तो चलिए बनाते है रसगुल्ले और सीखते है उनसे कैसे उन जैसा बन जाने में जीवन मिठास और आनंद से भर जाता है।

रसगुल्ले बनाने और बनने के लिए आपको चाहिए-

  • दूध – जो आप अभी है
  • निम्बू का रस जिसकी ख़टास से दूध फट जाता है – जो आपके आस-पास के वो लोग है जो आप में नकारात्मक विचार लाते है
  • एक कपड़ा जिससे फटें हुए दूध को छाना जाता है – जो कि आपकी सकारात्मक सोच है
  • एक डोर जिससे कपड़े को बाँधा जाता है- जो कि आपके अंदर की द्रढ़ता है

नोट: कपड़े से छन कर जो पानी निकलता है वो आपकी बुराइयाँ जैसे क्रोध, मान, लालच आदि है । अच्छा बनने के लिए उन्हें तो छोड़ना पड़ेगा ना?

  • एक वज़नी पत्थर जिसके नीचे फटें हुए दूध का पानी निकाल कर पनीर बनने के लिए दबाया जाएगा – ये वो परिस्थियाँ होंगी जब आप बाह्य दबाव आता है
  • एक लकड़ी का पटा जिस पर पटक-पटक कर आप पनीर को मसलेंगे और उसे मुलायम बनाएँगे – जो कि है मुश्किलें जो आपको आज़माने आती है
  • पानी और शक्कर के सही अनुपात से भरा एक भगौना आप चाहे तो बिना सीटी वाला कुकर भी ले सकते है – ये भगौना और कुकर है आपके आस पास का सामाजिक, पारिवारिक या कामकाजी परिप्रेक्ष्य। पानी और शक्कर के सही अनुपात का घोल हुआ आपका बात रखने और करने का लहजा। यही आपको अपने आप को संतुलित रखने की आवश्यकता सबसे अधिक होती। 
  • भगौने को ढकने के लिए एक थाली जिससे पानी और शक्कर के घोल से उठने वाली भाँप को रोका जाएगा ताकि रसगुल्ले फुल कर नर्म और मुलायम बन पाए – जो की होगा आपका धर्म और आध्यात्म जो आपको सदैव शांत और सरल बने रहने की बात करता है
  • गुलाब का अर्क (rose essence) या केसर की लच्छियाँ वैकल्पिक है जिसको सीमित मात्रा में डालने से स्वाद में बढ़ोतरी होगी और ना डालने पर कोई नुक़सान भी नहीं – जो कि है आपके छोटे-छोटे सामाजिक कार्य जिनको अगर कर लेंगे तो आनंद बढ़ जाएगा और अगर नहीं भी करेंगे तो भी कोई हर्ज नहीं
  • ऊपर बतायी हुई प्रक्रिया से गुजरने के बाद आपका जो प्रसन्नचित्त स्वरूप आप देखेंगे वो रसगुल्ले की तरह ही नर्म, मुलायम, मीठा और लज़ीज़ होगा। 

तो चलिए फटाफट समझते है की कैसे आप रसगुल्ला बन सकते है-

मान लीजिए आप दूध है।अब ध्यान से पढ़िए और उसे खुद से जोड़ने की कोशिश करिए। कई बार दोस्तों, रिश्तेदारों, सहकर्मियों, पड़ोसियों या पहचान वालों की ऐसी बातें सुनने को मिलती है जो आपमें निराशा या हीनता का भाव पैदा कर देती है। जिसकी वजह से या तो आप में घर छोड़कर भाग जाने का विचार आता है या आप खुद को हारा हुआ मान लेते है। आत्महत्या भी इसी का एक भयंकर परिणाम है।तोआपकोयहाँ उन्हीं बातों को ज़रिया बनाना है अपने रसगुल्ला बनने का। जैसे दूध उस निम्बू के रस की खटास से फट तो जाता है पर फट कर छैना या पनीर बन जाता है। जिसकी क़ीमत दूध से भी ज़्यादा होती है।अपनी सकारात्मक सोच के साथ आप उन नकारात्मक बातों से निकल कर खुद को निखार सकते है।अपने अंदर द्रढ़ विश्वास रखें कि आप उस नकारात्मकता से टूटेंगे नहीं। कहने वालों को कहने दीजिए। कोई भी असफलता आपको सिर्फ़ रोक सकती है कुछ समय के लिए; तोड़ नहीं सकती। परिस्थियाँ प्रतिकूल होने पर भी आपको आत्मविश्वास और स्वावलंबन पर डटे रहना है। इस बात को गाँठ बांध लीजिए कि मुश्किलें सिर्फ़ आपको और बेहतर बनाने के लिए आती है। कोई भी मुश्किल आपको एक सबक़ देकर जाएगी। परीक्षा में फेल हो गए, नौकरी चली गयी, शादी टूट गयी, व्यापार में नुक़सान हो गया, कोई अपना छोड़ कर चला गया… ये सब मुश्किलें महज़ आपको आज़माने आयी है।इसीलिए इनके आगे झुकना नहीं बल्कि इनसे लड़कर आगे बढ़ना है। जब आप इन मुश्किलों से सकुशल आगे बढ़ते है तो आप में आत्मविश्वास बढ़ता है। इसी समय आपको धर्म और आध्यात्मिकता का हाथ थामना चाहिए क्योंकि जब आपका मन शांत होगा तभी आप प्रभु का स्मरण और ध्यान लगा पाएँगे। और इसके साथ ही आप छोटे-छोटे सामाजिक कार्य करने लग जाए तो अपने अंदर की नकारात्मक भावना को मिटाने में सफल हो जाएँगे ।

सार यह है की- 

रसगुल्ला बनने के लिए उसकी तरह मसले जाओ, पीटे जाओ, तोड़े जाओ या फिर हारे जाओ; अपने अंदर का विश्वास कभी खोना नहीं, द्रढ विश्वास से आगे बढ़ना, समय-समय पर धर्म और आध्यतम की राह लेना और तप कर निखरना है। तो चलिए इस शुक्रवार से अपने आप को रसगुल्ला बनाने की प्रक्रिया शुरू करते है।
ब्लॉग पर अपने विचार कॉमेंट बॉक्स में ज़रूर साँझा करे; इससे मुझे लिखने की और दूसरों को पढ़ने की हिम्मत मिलती है।


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