गर्भधारण के एक साल पहले अपनाये ये 7 प्री-प्रेगनेंसी डाइट और लाइफस्टाइल की आदतें

गर्भधारण के एक साल पहले अपनाये ये 7 प्री-प्रेगनेंसी डाइट और लाइफस्टाइल की आदतें

माँ बनना बेहद सुखद अनुभव है। एक ऐसा अनुभव जिसे शब्दों में बांधना अनुचित होगा। गर्भधारण हर औरत के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है।ये वो ख़ुशी होती है जो उसे एक संपूर्ण औरत बनाती है। ममता का वो पहला एहसास सबसे सुखद होता है।

पहले का दौर और था जब महिलाएँ १८-२३ वर्ष की उम्र में माँ बन जाया करती थी। परंतु आज के दौर में उच्च शिक्षा, आधुनिकता और नारी सशक्तिकरण के चलते विवाह की सामान्य उम्र ही २५-३० वर्ष हो गयी है, कहीं-कहीं तो इससे भी ज़्यादा। ऐसे में परिवार को आगे बढ़ाने की उम्र भी आगे बढ़ जाती हैऔर यही वजह है की आज-कल गर्भ धारण करना और एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देना किसी चुनौती से कम नहीं रह गया।

अक्सर ऐसा सुनने में आता है की कई महीनों और सालों के प्रयासों के बाद भी दंपत्ति को सफलता नहीं मिलती और गर्भ धारण करना लगभग असंभव सा लगने लगता है! यही से शुरू होता है डाक्टर और प्रसूतिशास्त्री के पास जाने का सिलसिला और तरह-तरह के जाँच और दवाइयों का ख़र्चा।

कभी सोचा है पहले ये सब नहीं होता था पर फिर भी हमारी माँ, ताई, चाची, मामी, मौसी ने एक से अधिक बच्चों को जन्म दिया और वो भी सामान्य प्रसव प्रक्रिया से। आज से २५-३० साल पहले के दौर में सिजेरीयन डिलीवरी को लोग आश्चर्य से देखते थे और आज नोर्मल डिलीवरी को।

यह लेख एक सुझाव है उन आदतों को अपनाने का जिनसे आप गर्भ-धारण करने से पहले अपने शरीर को स्वस्थ बना सकती है और गर्भस्थ शिशु को एक बेहतर गर्भ दे सकती है। इसके साथ ही गर्भावस्था को बिना किसी परेशानी के व्यतीत कर सकती है –

सुबह ख़ाली पेट गर्म नींबू पानी पीना

नींबू विटामिन-सी का सबसे उम्दा स्रोत हैं। इसके साथ नींबू पोटेशियम, कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम आदि का भी एक समृद्ध स्रोत है।एक डीटॉक्सिफ़ायइंग एजेंट की तरह काम करते हुए यह लीवर को साफ करने में भी बहुत प्रभावी होता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है क्योंकि इलेक्ट्रोलाइट प्रदान करता है।सबसे महत्वपूर्ण यह शरीर को इम्यून सिस्टम की कमियों से बचाता है।

गर्भधारण के एक साल पहले से नींबू पानी
नींबू पानी

सुबह या शाम टहलने की आदत डालें

यहाँ मैं आपको प्रतिदिन चलने वाली स्टेप्स काउंट करने को या किसी एक फ़िक्स टाइम पर चलने की हिदायत नहीं दे रही। अपितु बस चलने की आदत डालने को कह रही हुँ। अपनी सुविधानुसार आधा-एक घंटा ज़रूर चलें। इससे बॉडी अनावश्यक भार नहीं ग्रहण करती।

घरेलू कामों की करने की आदत ख़ुद डालें

अगर आप वर्किंग वुमन नहीं है तो घर के काम ख़ुद करें। इससे शरीर लचीला और स्वस्थ तो रहता ही है, काम वाली बाई को देने वाला पैसा भी बचता है 😃 अपने घर में झाड़ू-पोछा करने में क्या शर्म और अपने कपड़े-बर्तन धोना क्या ग़लत? हाँ, अगर आप नौकरी पर जाती है तो काम वाली बाई की मदद आपके लिए ज़रूरी ज़रूर हो सकती है, पर इसमें ख़ुद के शरीर को चलायमान बनाए रखने के लिए कोई भी शारीरिक क्रिया को अपनी दिनचर्या का हिस्सा ज़रूर बनाए.

गर्भधारण से पहले Junk, Processed, और Packaged खाद्य सामग्री से बचें

फिर से ग़ौर करिए, मैंने यहाँ बचने के लिए कहा है, बंद करने को नहीं। असल में जानते में हम सब है की Junk, Processed और Packaged ख़ाना सही नहीं होता पर फिर भी हम खाते है। तो अपने इस शौक़ को बनाए रखें पर साथ ही साथ उस पर नज़र भी रखें। महीने में एक या दो बार ख़ाना अनुचित नहीं होगा परंतु इसका अधिक सेवन आपके शरीर को अंदर से कमज़ोर कर देगा। बनती कोशिश घर का बना ताज़ा और स्वस्थ ख़ाना खाए। घर में बना के ख़ाने के दो और फ़ायदे ये है की आपकी कुकिंग skills भी सुधरती है और पैसा भी बचता है 😃

गर्भधारण से पहले Alcohol और अन्य नशे से सटीक दूरी

इसे आदत कहना बेशक कई पाठकों को चौकाएगा परंतु ये है भी सत्य और प्रासंगिक। सामान्य तौर पर भी किसी प्रकार का नशा सेहत के लिए हानिकारक ही माना जाता है ऐसे में जब तब की आपको एक जीवन का संचार करना हो नशे की लत अत्यधिक बुरी आदत साबित हो सकती है। शरीर को तो नुक़सान है ही आपकी प्रजनन क्षमता को भी हानि पहुँच सकती हैं।

संयमित, सात्विक और सही समय पर भोजन ले

अभी तक लेख पढ़ के आप समझ ही गए होंगे की मेरा पूरा ज़ोर अब तक सिर्फ़ और सिर्फ़ शरीर को स्वस्थ बनाने पर है। इसी कड़ी में आगे आता है हमारा भोजन। तामसिक, देर रात्रि और असंयमित भोजन से सबसे ज़्यादा नुक़सान हमारा शरीर उठाता हैं। ज़ुबान तो स्वाद के पीछे लालयित होती है परंतु संयम से खाना ही एक मात्र उपाय है।

दिमाग़ को शांत रखना सीखें

TV, मोबाइल फ़ोन, इंटरनेट, सोशल मीडिया और अन्य मनोरंजन के लिए बनाए साधन ने हमारे दिमाग़ की शांति ख़त्म कर दी है। विचारों का बहुत प्रभाव पड़ता है गर्भस्थ शिशु पर इसीलिए ध्यान लगाना, जाप करना, योग करना, और TV, मोबाइल फ़ोन, इंटर्नेट, सोशल मीडिया से दूर रहना सीखें और अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए।

आखिर में

उपरोक्त बतायी/सुझायी गयी सभी आदतें आपको एक बेहतर माँ बनने के लिए तैयार करती हैं। पहले ये सब आम दिनचर्या का अंग होती थी। शरीर को लचीला और स्वस्थ रखने के लिए कभी भी हमारी दादी-नानी, माँ-माँसी, बुआ ने जतन नहीं किए इसीलिए पहले नोर्मल डिलिव्रीज़ हुआ करती थी। अब समय बदल गया हैं। इसलिए समय रहते इन आदतों को अपनाये और अपने गर्भस्थ शिशु को बेहतर जीवन की शुरुआत दे।

आपको ये ब्लॉग कैसा लगा कमेंट बॉक्स में ज़रूर बातये और इसे ज़रूर अपनी बहनों, सहेलियों और उन महिलाओ से साँझा करे जो जल्द ही आपको  #GoodNewz  देने वाली है  


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